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वैदिक गणित के सूत्र

वैदिक गणित के सूत्र देश में एक ऐसा वर्ग बन गया है जो कि संस्कृत भाषा से तो शून्य हैं परंतु उनकी छद्म धारणा यह बन गयी है कि संस्कृत भाषा में  जो कुछ भी लिखा है वे सब पूजा पाठ के मंत्र ही होंगे जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है। देखते हैं – “चतुरस्रं मण्डलं […]
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वेद-ज्ञान एवं प्राचीनकाल की महत्वपूर्ण पुस्तकें

वेद-ज्ञान एवं प्राचीनकाल की महत्वपूर्ण पुस्तकें प्र.1-  वेद किसे कहते है ? उत्तर-  ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है। प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ? उत्तर-  ईश्वर ने दिया। प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ? उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया। प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ? उत्तर- […]
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12 Things You Need to Know About Hinduism

1) Hinduism is at least 5000 years old Hinduism is one of a few ancient religions to survive into modern times. The collection of traditions that compose modern-day Hinduism have developed over at least the past 5000 years, beginning in the Indus Valley region (in the nations of modern India and Pakistan), in what was […]
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Largest Empires in India History

King Vikramaditya – (Whole Asia) King Vikramaditya made Ujjain his capital, in present-day Madhya Pradesh. He almost ruled whole Asia .    Vikramaditya  empire controlled many parts of Modern day China, Entire Middle   East and Many Parts of South East Asia. Vikramaditya king defeated Rome’s  Julius Caesar in battle and defeated Shakas NOTE : […]
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पुराण को समझें, आज के सन्दर्भ में

मित्रों,विष्णु पुराण के रचनाकार पराशर ऋषि थे। ये महर्षि वशिष्ठ के पौत्र थे। इस पुराण में पृथु, ध्रुव और प्रह्लाद के प्रसंग अत्यन्त रोचक हैं। ‘पृथु’ के वर्णन में धरती को समतल करके कृषि कर्म करने की प्रेरणा दी गई है। कृषि-व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करने पर ज़ोर दिया गया है। घर-परिवार, ग्राम, नगर, दुर्ग आदि […]
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कृष्ण की प्रतिज्ञा

रथ का पहिया लेके #भीष्म की ओर दौड़ते #कृष्ण और उन्हें रोकते #अर्जुन यह चित्र बहुत ही सुंदर है। इस दृश्य पर कईं बार चिंतन करता हूँ मैं। सोचता हूँ कि क्या गजब का दृश्य रहा होगा, जब योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण अपनी शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा को तोड़के रथ का पहिया उठाके भीष्म की […]
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सोलह सुख

  सोलह सुख ****पहला सुख निरोगी काया।दूजा सुख घर में हो माया।तीजा सुख कुलवंती नारी।चौथा सुख सुत आज्ञाकारी। पाँचवा सुख सदन हो अपना।छट्ठा सुख सिर कोई ऋण ना।सातवाँ सुख चले व्यापारा।आठवाँ सुख हो सबका प्यारा। नौवाँ सुख भाई औ’ बहन हो ।दसवाँ सुख न बैरी स्वजन हो।ग्यारहवाँ मित्र हितैषी सच्चा।बारहवाँ सुख पड़ौसी अच्छा। तेरहवां सुख […]
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