Author name: bharat

एकात्मता स्तोत्र (Ekatmata Stotra)

सच्चिदानंदरूपाय – एकात्मता स्तोत्र, मंत्र अर्थ  ॐ सच्चिदानन्दरूपाय नमोस्तु परमात्मनेज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमाङ्गल्यमूर्तये ॐ सच्चिदानन्दरूपाय नमोस्तु परमात्मनेज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमाङ्गल्यमूर्तये || १ || प्रकृतिः पञ्चभूतानि ग्रहा लोकाः स्वरास्तथादिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वन्तु मङ्गलम्।। २।। रत्नाकराधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्यां वन्दे भारतमातरम् || 3 || महेन्द्रो मलयः सह्यो देवतात्मा हिमालयःध्येयो रैवतको विन्ध्यो गिरिश्चारावलिस्तथा || ४ || गङ्गा सरस्वती सिन्धुर्ब्रह्मपुत्रश्च गण्डकीकावेरी यमुना रेवा कृष्णा […]

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माँ सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।  या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥  या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।  सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।  वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥  हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।  वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

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प्रातः स्मरण मंत्र !! (Pratha Smaran Mantra)

प्रात: कर-दर्शनम्-कराग्रे वसते लक्ष्मी:, करमध्ये सरस्वती ।कर मूले तु गोविन्द:, प्रभाते करदर्शनम ॥१॥ पृथ्वी क्षमा प्रार्थना-समुद्रवसने देवि ! पर्वतस्तनमंड्ले ।विष्णुपत्नि! नमस्तुभ्यं पाद्स्पर्श्म क्षमस्वे ॥२॥ त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण-ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरांतकारीभानु: शाशी भूमिसुतो बुधश्च ।गुरुश्च शुक्र: शनि-राहु-केतवःकुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥३॥ सनत्कुमार: सनक: सन्दन:सनात्नोप्याsसुरिपिंलग्लौ च ।सप्त स्वरा: सप्त रसातलनिकुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम ॥४॥ सप्तार्णवा: सप्त कुलाचलाश्चसप्तर्षयो

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एकात्मता मंत्र (Ekatmata Mantra)

यं वैदिका मन्त्रदृशः पुराणाः इन्द्रं यमं मातरिश्वा नमाहुः।वेदान्तिनो निर्वचनीयमेकम् यं ब्रह्म शब्देन विनिर्दिशन्ति॥ शैवायमीशं शिव इत्यवोचन् यं वैष्णवा विष्णुरिति स्तुवन्ति।बुद्धस्तथार्हन् इति बौद्ध जैनाः सत् श्री अकालेति च सिख्ख सन्तः॥ शास्तेति केचित् प्रकृतीः कुमारः स्वामीति मातेति पितेति भक्त्या।यं प्रार्थन्यन्ते जगदीशितारम् स एक एव प्रभुरद्वितीयः॥

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भगवान शिव के रहस्य

  भगवान शिव के रहस्य !! भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है। 🔱1. आदिनाथ शिव : – सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें ‘आदिदेव’ भी कहा जाता है। ‘आदि’ का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम

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वैदिक गणित के सूत्र

वैदिक गणित के सूत्र देश में एक ऐसा वर्ग बन गया है जो कि संस्कृत भाषा से तो शून्य हैं परंतु उनकी छद्म धारणा यह बन गयी है कि संस्कृत भाषा में  जो कुछ भी लिखा है वे सब पूजा पाठ के मंत्र ही होंगे जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है। देखते हैं – “चतुरस्रं मण्डलं

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वेद-ज्ञान एवं प्राचीनकाल की महत्वपूर्ण पुस्तकें

वेद-ज्ञान एवं प्राचीनकाल की महत्वपूर्ण पुस्तकें प्र.1-  वेद किसे कहते है ? उत्तर-  ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है। प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ? उत्तर-  ईश्वर ने दिया। प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ? उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया। प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ? उत्तर-

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